अब भाजपा सरकार मुस्लिम एवं अल्पसंख्यक वर्गों से शिक्षा छिनने के फिराक में हर मुस्लिम को पढ़ना जरूरी

भाजपा सरकार जब भी घिरने लगती है तो कोई न कोई मुस्लिम मुद्दा बीच में ले आती है
अब भाजपा सरकार मुस्लिम एवं अल्पसंख्यक वर्र्गों से शिक्षा छिनने के फिराक में आर्टिकल 30 हटने से सिर्फ मुस्लिम ही नहीं सारा अल्पसंख्यक समुदाय भी बहुत पीछे जाएगा

Constitution Front Page


आखिर क्या है आर्टिकल 30 जिसे भाजपा रद्द करने को कह रही है

आर्टिकल 30 विवरण


1 धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा।

(1क) खंड (1) में निर्दिष्ट किसी अल्पसंख्यक-वर्ग द्वारा स्थापित और प्रशासित शिक्षा संस्था की संपत्ति के अनिवार्य अर्जन के लिए उपबंध करने वाली विधि बनाते समय, राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसी संपत्ति के अर्जन के लिए ऐसी विधि द्वारा नियत या उसके अधीन अवधारित रकम इतनी हो कि उस खंड के अधीन प्रत्याभूत अधिकार निर्बन्धित या निराकृत न हो जाए...!

2 शिक्षा संस्थाओं को सहायता देने में राज्य किसी शिक्षा संस्था के विरुद्ध इस आधार पर विभेद नहीं करेगा कि वह धर्म या भाषा पर आधारित किसी अल्पसंख्यक वर्ग के प्रबंध में है
संविधान चवालीसवाँ संशोधन अधिनियम 1978 की धारा 4 द्वारा 20/06/1979 से अंत स्थापित है

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30 शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार है
  • भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है तथा धार्मिक अधिकारों और विशेषाधिकारों की सुरक्षा के साथ साथ जातीय अल्पसंख्यक देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की आधारशिला है हिंदू बाहुल्य क्षेत्र होने के बाद भी भारत का संविधान विशेष रूप से अल्पसंख्यकों के कुछ अधिकारों का समर्थन करता है और भारत के नागरिकों के धर्म जाति या लिंग के सभी मूलभूत अधिकारों को स्पष्ट करता है...!
  • अनुच्छेद/Article 30 को भारतीय संविधान के भाग तृतीय (III) के तहत वर्गीकृत किया गया है और यह अनुच्छेद शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंध और अल्पसंख्यकों के अधिकार का समर्थन करता है...!


मदरसा में बच्चे पढ़ते हुई (फोटो गूगल)

Article/अनुच्छेद 30 की विशेषता



  1. समानता के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए भारत में अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ अधिकारों की रक्षा करने का प्रावधान आर्टिकल 30 में शामिल है...!
  2. धर्म और भाषा के आधार पर सभी अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों को स्थापित और प्रबंध करने का अधिकार है...!
  3. साथ ही राज्य को यह सुनिश्चित करना होगा कि संपत्ति के अधिग्रहण के लिए जरूरी राशि समुदाय के बजट से अधिक ना हो इसलिए, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि अनुच्छेद के तहत प्रत्याभूत अधिकार प्रतिबंधित या रद्द ना किया गया हो...!
  4. आर्टिकल 30 में एक स्तरीय खेल का मैदान बनाने के लिए भी एक उपधारा है। इस अनुच्छेद के अनुसार, देश की सरकार धर्म या भाषा की वजह से किसी भी अल्पसंख्यक समूह द्वारा संचालित शैक्षिक संस्थानों को सहायता देने में कोई भी भेदभाव नहीं करेगी।


आर्टिकल 30 की आलोचना


भारत में जातीय और साथ ही धार्मिक अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए अनुच्छेद/Article 30 को विभिन्न धाराओं के साथ शामिल किया गया था, वहीं इस में कुछ कमियाँ भी हैं।
वास्तविक तथ्य यह है कि अल्पसंख्यकों के पास स्थापित शैक्षिक संस्थानों का व्यक्तिगत नियंत्रण होता है जिसका अर्थ यह है कि सरकार इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती।


इसके गठन और साथ ही प्रबंधन पर नियंत्रण की वजह से भ्रष्टाचार के मामले में सरकार के पास हस्तक्षेप करने और स्थिति को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं होगा आर्टिकल 30 अल्पसंख्यक संस्थानों को शिक्षा अधिनियम के अधिकार के अनुसार गरीबों के लिए अपनी 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की छूट देता है जो भारत के संविधान में निहित मूलभूत अधिकारों के विपरीत है...!

इसके अलावा भी आर्टिकल 30 की धारा 1 (ए) के अनुसार पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण नीति को लागू करने की बाध्यता अल्पसंख्यक संस्थानों की नहीं है। एक बार फिर भारतीय संविधान के अनुसार यह पिछड़े वर्गों के अधिकारों का खंडन करती है। जबकि यह अनुच्छेद अल्पसंख्यकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है और यह वास्तव में गैर अल्पसंख्यकों को नकारते हुए अपने संस्थानों को स्थापित और प्रशासित करने का मौलिक अधिकार है।

उत्तर प्रदेश काँग्रेस ने कहा शुक्र मनाइए कि सोनू सूद जी महाराष्ट्र में हैं यूपी में होते तो जेल में डाल देती सरकार

कोरोना वायरस संकट के बीच उत्तर प्रदेश में प्रवासी मजदूरों को लेकर योगी सरकार और कांग्रेस में आरपार की जंग चल रही है. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच ट्विटर वॉर जारी है, तो अब यूपी कांग्रेस की ओर से योगी सरकार पर तंज कसा गया है.

तस्वीर ट्विटर से ली गई


ये तंज बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद को लेकर कसा है, जिसमें कहा है कि अगर सोनू यूपी में होते तो योगी सरकार उन्हें जेल भेज देती



यूपी कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से मंगलवार सुबह ट्वीट कर लिखा गया, ‘शुक्र मनाइए कि सोनू सूद जी महाराष्ट्र में नेक काम कर हजारों यूपी के लोगों को मदद कर रहे हैं.


यूपी में होते तो यूपी सरकार पहले बसों को स्कूटर बोलती, फिर उनकी फिटनेस का अड़ंगा अटकाती और फिर सोनू सूद को जेल में डाल देती. योगी सरकार नेक कार्य/ सेवा कार्य करने पर जेल भेजती है.’


दरअसल, प्रियंका गांधी वाड्रा की ओर से यूपी बॉर्डर पर फंसे मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए एक हजार बसों का प्रबंध किया गया, लेकिन यूपी सरकार के साथ लंबी चर्चा के बाद इनका इस्तेमाल नहीं हो पाया. और बसें खाली ही वापस चली गईं. तभी से यूपी कांग्रेस और यूपी सरकार में आर-पार की जंग जारी है.

इस दौरान आगरा में यूपी पुलिस ने यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू को हिरासत में लिया और अब वह न्यायिक हिरासत में हैं. यही कारण है कि कांग्रेस योगी सरकार पर हमलावर है.


बीते दिनों प्रियंका गांधी की ओर से एक बार फिर योगी सरकार पर निशाना साधा गया और टेस्टिंग पर सवाल खड़े किए गए. प्रियंका ने योगी के उस बयान को निशाने पर लिया, जिसमें यूपी सीएम ने कहा था कि महाराष्ट्र-दिल्ली से आने वाले अधिकतर मजदूरों में कोरोना का संक्रमण है.


वहीं, अगर बात सोनू सूद की करें तो बॉलीवुड अभिनेता इन दिनों प्रवासी मजदूरों की मदद कर काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं. महाराष्ट्र के कई इलाकों से बीते दिनों प्राइवेट बसों में हजारों मजदूरों को सोनू सूद उनके घर भेज चुके हैं, वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और लोगों की मदद कर रहे हैं. सोनू सूद के मुताबिक, अब वह रोज करीब एक-दो हजार मजदूरों को घर भेज पा रहे हैं.

JNU में हुए हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने उल्टा छात्रों के ऊपर ही केस दर्ज किया, ।। IndiaTopic

JNU में हुए हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने उल्टा छात्रों के ऊपर ही केस दर्ज किया, ।। IndiaTopic





नई दिल्ली: जवाहर लाल नेहरू विस्वविद्यालय में हाल में ही हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने 20 अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है. इन बीस लोगों में JNU अध्यक्ष आइशी घोष का नाम भी है. पुलिस ने ये FIR 4 जनवरी को सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने, सर्वर रूम को तबाह करने को लेकर की गई शिकायत के आधार पर दर्ज की है. बता दें कि JNU मामले में अब तक 4 FIR दर्ज की गई हैं.






पुलिस ने ये एफआईआर जेएनयू प्रशासन की शिकायत पर दर्ज की है. बता दें कि 5 जनवरी को जो JNU में हिंसा हुई उसमें आइशी घोष घायल हो गई थीं. आइशी ने इस हिंसा के लिए एबीवीपी पर आरोप लगाया था.




आइशी घोष ने क्या कहा



JNU में हुई हिंसा में बुरी तरह घायल हुई छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा है कि इस हमले में आरएसएस और एबीवीपी का हाथ है. बता दें कि घायल आइशी को अन्य घायल छात्रो के साथ इलाज के लिए एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ति कराया गया था जहां से उन्हें उपचार के बाद रिलीव कर दिया गया. सोमवार को वह ट्रामा सेंटर से सीधे JNU पहुंची.






क्या है मामला दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में रविवार को नकाबपोश हमलावरों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में तोड़फोड़, मारपीट के बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है. हालांकि अभी तक किसी हमलावर को गिरफ्तार नहीं किया गया है. आज भी देश की कई यूनिवर्सिटियों में छात्र हिंसा को लेकर प्रदर्शन कर सकते हैं.

मेरठ के SP का वीडियो वायरल पर बवाल मचा हुआ है , अब मायावती भी कूदी , पढ़े , ।। Topic India

मेरठ SP के वायरल वीडियो पर बवाल जारी है। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने एसपी सिटी अखिलेश नारायण को बर्खास्त करने की मांग की है




उत्तर प्रदेश: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर हो रहा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीएए को लेकर हो रहे प्रदर्शन के बीच मेरठ के एसपी सिटी के वायरल वीडियो ने नया बवाल खड़ा कर दिया है। जिसको लेकर यूपी की पू्र्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने पुलिस पर सवालिया निशान उठाया है। उन्होंने ट्वीटकर मेरठ के एसपी सिटी के प्रदर्शनकारियों के लिए इस्तेमाल शब्दों की घोर निंदा की है।




उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में वर्षों से रह रहे मुसलमान भारतीय हैं ना कि पाकिस्तानी अर्थात् CAA/NRC के विरोध-प्रदर्शन के दौरान खासकर उत्तर प्रदेश के मेरठ SP सिटी द्वारा उनके प्रति साम्प्रदायिक भाषा/टिप्पणी करना अति निन्दनीय व दुर्भाग्यपूर्ण है।'



ट्वीट देखें

Mayawati

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, 'ऐसे सभी पुलिसकर्मियों की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिये और दोषी होने के सही सबूत मिलने पर उनको तुरन्त नौकरी से बर्खास्त करना चाहिये। बीएसपी की यह मांग है।'







ट्वीट देखें


Mayawati

दरअसल, सोशल मीडिया पर मेरठ के एसपी सिटी का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो सीएए के खिलाफ सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों को पाकिस्तान जाने की सलाह देते दिखाई दे रहे हैं। इस मामले के तूल पकड़े के बाद मेरठ के एडीजी और एसपी सिटी को भी सफाई देनी पड़ी।







वायरल वीडियो में क्या बोलते दिखे एसपी सिटी





सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ये वीडियो 20 दिसंबर का है। जिसमें एडीएम सिटी अजय तिवारी और एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह हिंसा के दौरान भागते युवकों को ये कहते देखे गए कि.... 'जहां जाओगे, चले जाओ। हम ठीक कर देंगे। काली पट्टी बांधकर विरोध जता रहे हो, खाओगे यहां और गाओगे वहां का। याद रखना, मुझे सब याद रहता है।' इस वीडियो के वायरल होने के बाद मेरठ पुलिस ने अपनी सफाई में कहा कि कुछ प्रदर्शनकारी काली पट्टी बांधकर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि वहां की स्थिति बहुत खराब थी और पीएफआई व एडीपीआई के पम्पलेट बांटे जा रहे थे और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जा रहे थे।


जुम्मा की नामज़ से पहले फिर जारी किया योगी ने फरमान, पढ़ना जरूरी... ।। Topic India

जुमा की नामज़ से पहले फिर जारी किया योगी ने फरमान पढ़ना जरूरी... ।। Topic India




लखनऊ: लखनऊ सहित कई जिलों में इंटरनेट सेवा एक बार फिर बंद कर दी गई है। बुधवार को आठ बजे से शुरू हुई इंटरनेट सेवा गुरुवार को सुबह 10 बजे के बाद फिर बंद कर दी गई है।



इसे देखते हुए जुमे की नमाज इस बार कड़े पहरे में होगी। संवेदनशील इलाकों में पुलिस फोर्स बुधवार से बढ़ा दी गई है। बता दें कि 19 दिसंबर से इंटरनेट सेवा लखनऊ सहित कई जिलों में बंद कर दी गई थी।




जानकारी के मुताबिक इंटरनेट सेवा शुक्रवार शाम को चालू की जाएगी अगर स्थिति सामान्य रहती है तो। पिछले शुक्रवार को फिरोजाबाद सहित प्रदेश के कई जिलों में हिंसा हुई थी।
वहीं गुरुवार को एडीएम सिटी डॉ. प्रभाकांत अवस्थी ने इंटरनेट सेवा बंद किए जाने का आदेश जारी किया। इसमें यह भी बताया गया है कि लूप लाइन और लीज लाइन सेवा भी बंद रहेगी। इंटरनेट सेवा बंद किए जाने की वजह सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलना बताई गई है। डीएम एनजी रवि कुमार ने बताया कि धारा 144 के तहत ही इंटरनेट सेवा को बंद किया गया है। फिरोजाबाद जनपद में भी जुमे की नमाज को देखते हुए प्रशासन ने पैनी नजर रखना शुरू कर दिया है।






मोबाइल इंटरनेट सेवा को आज व शुक्रवार को बंद रखने का फैसला लिया है। वहीं मथुरा में भी 27 दिसंबर की शाम को छह बजे इंटरनेट बंद रखने का फैसला प्रशासन ने लिया है। लोगों के मोबाइल पर इंटरनेट सेवा बंद होने के मैसेज आने शुरू हुए हैं।

उत्तर प्रदेश में (CAA) सीएए प्रोटेस्ट में हुई हिंसा पर अखिलेश यादव के कड़े तेवर कहा सीएम योगी की भाषा की वजह से हुई 15 लोगों की मौत || Topic India


नगरपालिका संशोधन बिल को लेकर उत्तर प्रदेश के 22 से भी ज्यादा जिलों में हिंसा हुई थी जिसमे पुलिस और प्रदर्शनकारियों ने खूब तोड़ फोड़ की थी साथ ही प्रशासन द्वरा मुसलमानों की कई सारी दुकान भी सील की गई



लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन बिल के विरोध के दौरान भड़की हिंसा पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, ''लखनऊ की हिंसा भाजपा सरकार की देन हैं. अगर सरकार प्रदर्शनकारियों की बात सुनती तो शायद ऐसा नहीं होता. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती तो शांतिपूर्ण ढंग से धरना प्रदर्शन हो जाता लेकिन ऐसा सरकार ने नहीं किया .''



अखिलेश ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ सदन में कह रहे हैं की ''ठोको''. उनकी भाषा की वजह से 15 लोगों की मौत हुई है. पुलिस पर सवालिया निशान लगाते हुए भी इखिलेश यादव ने कहा कि पुलिस सरकार के इशारे पर काम कर रही है.





आगे अखिलेश यादव ने कहा कि संविधान से छेड़खानी की कोशिश हो रही है. दुनिया में देश की छवि बिगड़ रही है. उन्होंने कहा कि जामिया और एएमयू के बाद हर जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. अखिलेश ने इस (सीएए) कानून के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया.


अखिलेश यादव ने महिला सुरक्षा का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि आज माताएं-बहनें सुरक्षित नहीं हैं. अपराध बढ़ता ही जा रहा है. नौजवान रोजगार के लिए इधर उधर भटक रहा हैं.
अखिलेश ने हाल ही में योगी सरकार को निशाने पर लेते हुए एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने लिखा था, ''राज्य सरकार पक्षपाती CAA को लेकर जनता में विश्वास पैदा करने के बजाये ‘बदला लेने’ जैसी अलोकतांत्रिक भाषा का प्रयोग कर रही है, जिसकी वजह से आज कई जगह हालात बिगड़े हैं. ठोकतंत्र की सोच वालों को जनता अब और नहीं सहेगी.





आज देश क़ौमी एकता के लिए एक साथ खड़ा है

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जय हिंद!


एक दूसरे ट्वीट में अखिलेश ने मोदी सरकार पर जमकर हमला किया था. उन्होंने लिखा था, आज के सत्ताधारी ये न भूलें कि जब जनता एक साथ आगे बढ़ती है तो बड़े-से-बड़े दमनकारी को पीछे हटना पड़ता है. ये झुकेंगे भी और पीछे हटेंगे भी.''


देश की एकजुट जनता अपने संविधान के मूल मूल्यों की रक्षा का आंदोलन लड़ रही है.
बता दें कि यूपी के 22 जिलों में पिछले दिनों विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई. हंगामे के साथ साथ पब्लिक प्रॉपर्टी को जमकर नुकसान पहुंचाया गया. उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बृहस्पतिवार से हिंसा में अब तक 15 लोग मारे जा चुके हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस ने कहा कि हिंसा की वारदात में 263 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं जिनमें से 57 को गोलियां लगी हैं. इस दौरान 705 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 4500 हिरासत में हैं.

मुसलमानों पर जुल्मढाह रही उत्तर प्रदेश की पुलिस, पुलिस के जुल्म से अभी तक हुई इतनी मौतें ।। Topic India

मुसलमानों पर जुल्मढाह रही उत्तर प्रदेश की पुलिस, पुलिस के जुल्म से अभी तक हुई इतनी मौतें
तस्वीर UP 20 दिसम्बर


नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में सबसे ज़्यादा अजीब रवैया यूपी पुलिस का देखने को मिला यहां इन प्रदर्शनों के दौरान 16 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मरने वाले 16 में से 14 लोगों की मौत गोली लगने से हुई. अख़बार से इस बात की पुष्टि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने की है


बाकी के दो लोगों में फ़िरोज़ाबाद में राशिद की मौत सिर पर चोट लगने से और वाराणसी में आठ वर्षीय मोहम्मद सगीर की मौत भगदड़ में दबने से हुई


लोगों की मौत गोली लगने से हुई है उनकी पहचान इस प्रकार की गई है.

मोहम्मद वकील (32 साल) लखनऊ,
आफ़ताब आलम (22 साल) और
मोहम्मद सैफ़ (25 साल) कानपुर में
अनस (21 साल) और सुलैमान (35 साल) बिजनौर में
बिलाल (24 साल) और मोहम्मद शेहरोज़ (23 साल) संभल में,
जहीर (33 साल),
आसिफ़ (20 साल) और
आरिफ़ (20 साल) मेरठ में,
नबी जहान (24 साल) फ़िरोज़ाबाद में
और फ़ैज़ ख़ान (24 साल) रामपुर में


उत्तर प्रदेश के मुजफ्फनगर में 58 दुकानों पर नोटिस चिपका कर दिए गए कि तत्काल एक करोड़ रुपए जुर्माना जमा कराए।। Topic India

ये कैसा कानून

कानून के जानकार बताएं कि किस अधिकार से जिलाधिकारी को न्यायिक शक्तियां प्राप्त होती हैं।


उत्तर प्रदेश के मुजफ्फनगर में 58 दुकानों पर नोटिस चिपका कर दिए गए कि तत्काल एक करोड़ रुपए जुर्माना जमा कराए अन्यथा उनकी दुकानों की सार्वजनिक नीलामी 30 दिसम्बर से शुरू कर दी जाएगी।



पीड़ितो के नाम हम इसलिए नहीं लिख रहे क्योंकि फिर उसमे कुछ दोस्त धर्म तलाश करने लगेंगे और हम #हिन्दू #मुस्लिम जैसा कुछ नहीं मानते।



बिना कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए किसी भी नागरिक की सम्पत्ति यदि एक्सिक्यूटिव पॉवर के तहत सरकार द्वारा कुर्क की जा सकती हैं तो क्या इन्हीं शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए किसी को भी विदेशी अथवा घुसपैठियों घोषित करके डिटेंशन सेंटर में नहीं डाला जा सकता ?



हिटलर के समय में तो ऐसे होलोकास्ट सुने थे लेकिन अब तो समाज काफी सभ्य हो चुका है !

CAA NRC के समर्थन में क़तर में रह रहा भारतीय डॉक्टर ने की भारतीय मुसलमानों पर विवादास्पद टिप्पणी पड़ा नौकरी से हाथ धोना।। Topic India

CAA NRC के समर्थन में क़तर में रह रहा भारतीय डॉक्टर ने की विवादास्पद टिप्पणी पड़ा से हाथ धोना

डॉ अजित श्रीधरन की फेसबुक पर टिप्पणी


आरएसएस विचारधारा के लोग खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय मुसलमानों पर कर रहे आपत्तिजनक टिप्पणी कई लोग हुई नौकरी से ससपेंड



क़तर से आ रही चिंताजनक खबर 



क़तर में नसीम हेल्थकेयर ग्रुप में बतौर डॉक्टर के काम कर रहे । डॉ अजित श्रीधरन ने राजनीतिक मामलों पर भारतीय मुसलमानों पर की अपनी विवादास्पद टिप्पणी मामला सोशल मीडिया पर वायरल के बाद कंपनी को डियां इस्तीफा बाद में कंपनी ने भी नोटिस जारी कर के दी जानकारी



पढ़े अनुवाद कंपनी ने क्या कहा




"बता दें कि, डॉ अजित श्रीधरन ने राजनीतिक मामलों पर अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के बाद, तत्काल प्रभाव से नसीम हेल्थकेयर ग्रुप के विशेषज्ञ - हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है:





प्रबंधन आपकी ओर से ध्यान दिलाना चाहता है कि डॉ द्वारा दिया गया बयान।  । अजित श्रीधरन विशुद्ध रूप से व्यक्तिगत हैं और प्रबंधन के ज्ञान के लिए नहीं हैं या किसी भी तरह से समूह के विचारों को प्रतिध्वनित नहीं करते हैं।  जैसा कि आप सभी जानते हैं, एक राजनीतिक संगठन होने के नाते, नसीम हेल्थकेयर ग्रुप एक कार्य वातावरण को बनाए रखने के लिए अच्छा अनुशासन, सम्मान और प्रतिबद्ध है, जिसमें सभी व्यक्तियों को किसी भी धर्म, विश्वास, रंग, नस्ल, जातीयता के बावजूद सबसे अधिक सम्मान और सम्मान के साथ समान व्यवहार किया जाता है आर्थिक और राजनीतिक स्थिति।




गौरतलब है कि 22 दिसम्बर को सऊदी अरब के दम्मम में भी ऐसा ही वाकया सामने आया था हरीश बंगरा नाम के व्यक्ति ने पवित्र स्थल काबा को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी बाद में सोशल मीडिया पर उसकी पोस्ट वायरल होने के बाद में उसे दम्मम पुलिस द्वरा ग्रिफ्तार कर लिया गया था




यहां क्लिक कर के पढ़े हरीश बंगरा की खबर

57 देश के मुस्लिम संगठन ओआईसी ने भारत में बने कानून CAA और NRC को लेकर किया बड़ा दखल || Topic India

ओआईसी भारत के नागरिकता कानून और बाबरी मस्जिद मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की है

मक्का - इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भारत के नए विवादास्पद नागरिकता कानून (CAB) पर गहरी चिंता व्यक्त की, जो मुसलमानों को नागरिकता प्राप्त करने से रोकता है और बाबरी मस्जिद अदालत का मामला भी है, जिसमें कहा गया है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत बनाए रखना चाहिए।

Photo Via 
@OIC_OCI Twitter


डॉ। यूसेफ बिन अहमद अल-ओथेमीन, ओआईसी के महासचिव हाल के घटनाक्रमों के बाद भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यक को प्रभावित कर रहे हैं।




ओआईसी के आधिकारिक ट्वीट में कहा गया है कि नागरिकता के अधिकार और बाबरी मस्जिद मामले दोनों से संबंधित हाल के घटनाक्रम पर उन्होंने चिंता व्यक्त की।




एक अन्य ट्वीट में, डॉ। अल-ओथाइमेन ने मुस्लिम अल्पसंख्यक की सुरक्षा और भारत में इस्लामी पवित्र स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओआईसी के आह्वान को स्पष्ट रूप से दोहराया, बाबरी मस्जिद का उल्लेख किया।

OIC की स्थापना 1969 में हुई थी जिसमें 57 देश शामिल हैं जिनमें से 53 मुस्लिम बहुल देश हैं।




संगठन का उद्देश्य सामूहिक रूप से मुस्लिम दुनिया के मुद्दों पर आवाज उठाना है और "अंतरराष्ट्रीय शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने की भावना में" मुस्लिम दुनिया के हितों की रक्षा और सुरक्षा के लिए काम करना है, यह आधिकारिक वेबसाइट कहती है।

इंग्लिश से इनपुट 
दोस्तों इंग्लिश का जायदा ज्ञान न होने से ट्रांसलेशन में गलती भी हो सकती है 

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